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ऐतिहासिक फैसला: ‘वंदे मातरम्’ के लिए नया प्रोटोकॉल जारी; अब 3 मिनट 10 सेकंड का संस्करण होगा अनिवार्य

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी 10 पन्नों के नए प्रोटोकॉल के अनुसार, अब आधिकारिक अवसरों पर राष्ट्रीय गीत का छह अंतरों वाला विस्तारित संस्करण (कुल समय: 3 मिनट 10 सेकंड) बजाया या गाया जाना अनिवार्य होगा।

​अब तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए ही स्पष्ट प्रोटोकॉल मौजूद थे, लेकिन 28 जनवरी को जारी इस आदेश के बाद अब ‘वंदे मातरम्’ को भी वही औपचारिक गरिमा प्रदान की गई है।

📍 कब और कैसे होगा प्रस्तुतीकरण?

​मंत्रालय के आदेशानुसार, राष्ट्रीय गीत के गायन या वादन के नियम तय कर दिए गए हैं:

  1. क्रम: यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ होगा और उसके बाद ‘जन गण मन’
  2. उपस्थिति: राष्ट्रीय गीत बजते समय सभी उपस्थित लोगों को ‘सावधान’ (Attention) की मुद्रा में खड़े होकर सम्मान देना अनिवार्य होगा।
  3. अपवाद: यदि यह गीत किसी न्यूज़रील या डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा है, तो दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी ताकि अव्यवस्था न फैले।

📂 तीन श्रेणियों में बांटे गए कार्यक्रम

​सरकार ने कार्यक्रमों की प्रकृति के आधार पर नियमों को तीन वर्गों में विभाजित किया है:

📜 पृष्ठभूमि और महत्व

​बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित इस गीत को 1950 में राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला था। अब तक इसके केवल पहले दो अंतरों का ही प्रचलन अधिक था, लेकिन नए आदेश के साथ इसके मूल और विस्तारित स्वरूप (6 अंतरों) को आधिकारिक पहचान दी गई है।

विशेष तथ्य: हाल ही में गणतंत्र दिवस परेड का विषय भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ रखा गया था, जो इस गीत को जन-जन तक पहुँचाने की सरकार की मुहिम का हिस्सा है।

⚠️ मुख्य बदलाव एक नजर में:

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