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MGM अस्पताल की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था: इलाज और स्ट्रेचर के अभाव में दो मरीजों की मौत, ‘सेवा ही लक्ष्य’ ने सरकार को घेरा

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विशेष रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

जमशेदपुर: शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल MGM की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और लचर व्यवस्था के कारण दो और मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। आरोप है कि इमरजेंसी और ओपीडी (OPD) जैसे संवेदनशील विभागों में न तो समय पर डॉक्टर उपलब्ध थे और न ही मरीजों को अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर नसीब हुआ।

​इस गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही ‘सेवा ही लक्ष्य’ (युवशक्ति) संस्था के संस्थापक पीयूष ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा हमला बोला।

मरीजों की जान से खिलवाड़: ये हैं मुख्य समस्याएं

​पीयूष ठाकुर ने अस्पताल परिसर से जमीनी हकीकत उजागर करते हुए तीन सबसे बड़ी खामियों को सामने रखा:

“डॉक्टरों को बात करने की तमीज नहीं, कुंभकर्णी नींद में हैं स्वास्थ्य मंत्री”

​पीयूष ठाकुर ने कड़े शब्दों में अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ के व्यवहार पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा:

​”MGM अस्पताल के कई डॉक्टरों को मरीजों के परिजनों से बात करने की तमीज तक नहीं है। उन्हें यह सीखने की जरूरत है कि संकट के समय में कैसा व्यवहार किया जाता है। हॉस्पिटलिटी और मेडिकल प्रोफेशन में साफ सिखाया जाता है कि आपको प्रोफेशनल होना चाहिए, आपका एटीट्यूड सही हो और आपको विपरीत परिस्थितियों को संभालना (Situation Management) आना चाहिए।”

​उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल में गरीब मरीज तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। आखिर दो मौतों और लगातार सामने आ रहे इमरजेंसी मामलों के बाद भी व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही? स्वास्थ्य मंत्री को जवाब देना होगा कि MGM को भगवान भरोसे क्यों छोड़ दिया गया है।

‘सेवा ही लक्ष्य’ (युवशक्ति) की मुख्य मांगें:

​युवा संगठन ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत निम्नलिखित सुधार करने की मांग की है:

  1. 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती: MGM अस्पताल के इमरजेंसी और ओपीडी में चौबीसों घंटे डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
  2. संसाधनों की तत्काल बहाली: आपातकालीन वार्ड में पर्याप्त स्टाफ, पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और जीवन रक्षक दवाओं की तुरंत व्यवस्था हो।
  3. स्वास्थ्य मंत्री खुद करें औचक निरीक्षण: सूबे के स्वास्थ्य मंत्री स्वयं आकर अस्पताल का औचक निरीक्षण करें और इस बदहाली के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उन पर कार्रवाई करें।

​पीयूष ठाकुर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जमशेदपुर और आसपास की गरीब जनता की जान के साथ अब और खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो संस्था उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

– ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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