जमशेदपुर | तीसरी धारा न्यूज
जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी सरजामदा स्थित बड़ा सरजामदा तालाब के किनारे विधायक निधि से करीब 13 लाख रुपये की लागत से बन रहा 230 फीट लंबा आरसीसी (RCC) गार्डवाल पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सका और ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
गार्डवाल गिरने के साथ ही तालाब की मेढ़ पर दूसरे विभाग द्वारा बनाई जा रही 10 फीट चौड़ी और 700 फीट लंबी सड़क का एक बड़ा हिस्सा भी पानी के तेज बहाव में बह गया। इस घटना को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुध का आलम यह है कि अब तक न तो कोई विभागीय जांच टीम मौके पर पहुंची है और न ही संबंधित इंजीनियर या ठेकेदार ने स्थिति का जायजा लेना मुनासिब समझा है।
देर रात तेज आवाज के साथ ढहा निर्माण, आवागमन ठप
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार देर रात करीब 2 बजे मूसलाधार बारिश के दौरान अचानक तेज आवाज हुई और गार्डवाल का बड़ा हिस्सा सड़क समेत भरभरा कर ढह गया। इस हादसे के कारण उत्तरी सरजामदा और शंकरपुर को जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे दोनों गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
घटिया निर्माण सामग्री और अनदेखी का आरोप
स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि:
- निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
- तय मानकों के अनुरूप सरिया (छड़) नहीं लगाया गया।
- काम के दौरान कई बार गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गईं, लेकिन ठेकेदार ने विभागीय शह पर शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
इसके अलावा, तालाब से जल निकासी के लिए पुलिया का निर्माण होना तय था, लेकिन दो गांवों के बीच विवाद के कारण जल निकासी का सही इंतजाम नहीं किया जा सका। बारिश के दौरान पानी का दबाव अचानक बढ़ा और घटिया निर्माण के कारण गार्डवाल और सड़क दोनों बह गए, जिससे भारी मृदा अपरदन (मिट्टी का कटाव) भी हुआ है।
50 हजार की मछलियों पर मंडराया संकट:
तालाब के मालिक वारिस महतो ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में करीब 50 हजार रुपये की मछली का बीज तालाब में डाला था। गार्डवाल टूटने के कारण अब सारी मछलियों के बह जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार को बार-बार गुणवत्ता सुधारने को कहा गया था, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही विभागीय इंजीनियर कभी मुआयना करने आए।
ग्रामीणों की मांग: उपायुक्त कराएं उच्चस्तरीय जांच
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार व संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।
मामले पर पक्ष-विपक्ष (बयान)
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- ठेकेदार का पक्ष: “दो गांवों के बीच जल निकासी को लेकर आपसी विवाद के कारण स्थायी समाधान नहीं निकल सका, इसी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जहां तक सड़क और गार्डवाल निर्माण की बात है, कार्य पूरी गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार विभागीय इंजीनियरों की निगरानी में कराया गया है।” — संतोष ओझा, ठेकेदार
“दो गांवों के बीच जल निकासी को लेकर आपसी विवाद के कारण स्थायी समाधान नहीं निकल सका, इसी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जहां तक सड़क और गार्डवाल निर्माण की बात है, कार्य पूरी गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार विभागीय इंजीनियरों की निगरानी में कराया गया है।”
— संतोष ओझा, ठेकेदार
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- विभाग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: “मुझे अभी इसकी जानकारी नहीं है, देखना पड़ेगा। फिलहाल मैं इसकी लागत और लंबाई के बारे में कुछ नहीं बता सकता।” — विजय भूषण, जूनियर इंजीनियर
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“मुझे अभी इसकी जानकारी नहीं है, देखना पड़ेगा। फिलहाल मैं इसकी लागत और लंबाई के बारे में कुछ नहीं बता सकता।”
— विजय भूषण, जूनियर इंजीनियर
