रांची/जमशेदपुर:
झारखंड राज्य सूचना आयोग को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नए सूचना आयुक्त मिलने जा रहे हैं। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर बुधवार को अपनी सशर्त स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्यपाल की इस मंजूरी के बाद अब वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा समेत चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राजभवन से फाइल स्वीकृत होने के बाद राज्य सरकार द्वारा जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद सभी मनोनीत सदस्य पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
इन चार नामों पर लगी मुहर
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किए गए प्रस्ताव में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े चार प्रमुख चेहरों को सूचना आयुक्त के पद पर जिम्मेदारी दी गई है:
- अनुज कुमार सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार)
- शिवपूजन पाठक
- तनुज खत्री
- अमूल्य नीरज खलखो
राज्यपाल ने लगाईं सख्त शर्तें, मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के भी निर्देश
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस बार संचिका (फाइल) को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही राज्य सरकार के सामने कुछ कड़े निर्देश और शर्तें भी रखी हैं:
- मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति जल्द हो: राज्यपाल ने सरकार को निर्देशित किया है कि झारखंड राज्य सूचना आयोग में ‘मुख्य सूचना आयुक्त’ (Chief Information Commissioner) के रिक्त पद को भी जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि आयोग का कामकाज पूरी तरह सुचारू और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
- जवाबदेही राज्य सरकार की होगी: राजभवन ने स्पष्ट किया है कि यदि इन सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में कोई भी प्रक्रियागत खामी या त्रुटि पाई जाती है, अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों के अनुपालन को लेकर कोई कानूनी सवाल उठता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।
दो बार वापस लौट चुकी थी फाइल, विरोध में भी सौंपे गए थे ज्ञापन
मालूम हो कि इस नियुक्ति को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से पेंच फंसा हुआ था। इससे पहले राज्यपाल ने दो बार इस नियुक्ति से संबंधित संचिका को वापस लौटा दिया था:
- पहली बार: सूची में शामिल तीन सदस्यों का राजनीतिक दलों से सीधा संबंध होने की बात सामने आने पर फाइल वापस की गई थी। इसके बाद सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दोबारा फाइल भेजी।
- दूसरी बार: कुछ सदस्यों पर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद राज्यपाल ने पुनः स्पष्टीकरण की मांग करते हुए फाइल लौटा दी थी।
इसके अलावा, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर इस नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने की मांग भी की थी। बहरहाल, सरकार के जवाबों के बाद अब राज्यपाल ने शर्तों के साथ इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
