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गोंड राजाल-रानी फैशन शो 2026: आदिवासी संस्कृति को मिला राष्ट्रीय मंच, गोंडिया में बिखरे परंपरा के रंग

गोंडिया (महाराष्ट्र):

आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत, कला और पारंपरिक पहचान को आधुनिक दौर में एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से गोंडिया की धरती पर “गोंड राजाल – गोंड रानी फैशन शो 2026 (सेशन-2)” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम ने न केवल आदिवासी संस्कृति का प्रदर्शन किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गोंड राजा और गोंड रानी का चयन कर समाज की एकता और गौरव को रेखांकित किया।

सांस्कृतिक वैभव और आधुनिकता का संगम

​आयोजन के दौरान पारंपरिक गोंड वेशभूषा, विलुप्त होते आभूषणों और आधुनिक फ्यूजन परिधानों का अद्भुत मेल देखने को मिला। रैंप पर जब गोंड राजा और रानी के रूप में युवा उतरे, तो दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

प्रिया चंदन टेकाम का संकल्प

​इस गरिमामयी कार्यक्रम की मुख्य आयोजक प्रिया चंदन टेकाम (Royal Lady, नागपुर) रहीं। समाज सेवा के प्रति समर्पित प्रिया टेकाम ने इस मंच के माध्यम से अनुसूचित जनजाति समाज को मुख्यधारा और आधुनिक भारत से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “पूरा आदिवासी समाज मेरा परिवार है। मेरा जीवन इनके विकास, शिक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए समर्पित है।”

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक संजय भाऊपुरम उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में विधायक राजकुमार बडोले, चेयरमैन चेतन भाऊ वारगये, सरपंच विलास वट्टी और समाजसेवी बसंत लांजेवार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे आदिवासी युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम बताया।

उठ रही है बड़ी मांग: > कार्यक्रम के दौरान समाज के बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में मांग उठाई कि प्रिया चंदन टेकाम के जमीनी कार्यों को देखते हुए सरकार को उन्हें किसी राज्य आयोग या महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी देनी चाहिए। समाज का मानना है कि उनकी सक्रियता से आदिवासी मुद्दों को सरकार तक अधिक मजबूती से पहुँचाया जा सकता है।

सफलता के सूत्रधार

​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में पूनम टेकाम, सपना चांदेकर, समीर दुर्वे और अंशुल पांद्रे सहित कई स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शो महज एक फैशन प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता और पहचान को सशक्त करने वाला एक आंदोलन बनकर उभरा है।

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