नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। अमेरिकी क्रूड ऑयल शुरुआती कारोबार में 9 फीसदी से ज्यादा उछलकर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो अक्टूबर 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं ब्रेंट क्रूड भी $90 के स्तर को पार कर गया है।
क्यों लगी तेल की कीमतों में आग?
इस उथल-पुथल की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है।
- अहम सप्लाई रूट: इस संकरे मार्ग से दुनिया का करीब 20% तेल (2.08 करोड़ बैरल रोजाना) गुजरता है।
- 90% की गिरावट: सुरक्षा जोखिम और भारी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या सामान्य से 90 फीसदी तक घट गई है।
- बड़ा खतरा: यदि यह बाधा बनी रहती है, तो प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई खतरे में पड़ सकती है, जो 1990 के कुवैत युद्ध से भी बड़ा झटका होगा।
ट्रंप के बयान से अमेरिकी बाजार में हाहाकार
युद्ध के तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी का काम किया है। ट्रंप ने लिखा— “ईरान के साथ कोई डील नहीं होगी सिवाय उसके सरेंडर के!” इसके तुरंत बाद अमेरिकी शेयर बाजार गोता लगाने लगे:
- डाउ जोंस: 900 अंकों की भारी गिरावट।
- S&P 500 व नैैस्डैक: 1.4% से 1.6% तक लुढ़के।
- अमेरिका में बेरोजगारी के आंकड़ों ने भी ‘स्टैगफ्लेशन’ (महंगाई और मंदी का एक साथ आना) का डर बढ़ा दिया है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में $10 की भी बढ़ोतरी भारत के लिए घातक साबित होती है।
- आयात बिल में भारी वृद्धि: विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्रेंट क्रूड $100 तक पहुंचता है, तो भारत का सालाना तेल आयात बिल 20 से 25 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगा।
- रुपये में गिरावट: तेल का भुगतान डॉलर में होता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा।
- महंगाई की मार: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (Logistics) महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ना तय है।
राहत की एक किरण: 30 दिन की छूट
इस संकट के बीच अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। इसके तहत भारत समुद्र में पहले से लोड रूसी कच्चे तेल के कार्गो खरीद सकता है। यह व्यवस्था अप्रैल की शुरुआत तक भारत को वैकल्पिक इंतजाम करने का समय देगी।
निष्कर्ष:
अगर खाड़ी देशों में तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय उपभोक्ताओं को भी महंगाई के एक लंबे दौर के लिए तैयार रहना होगा।
तीसरी धारा न्यूज के लिए बिजनेस डेस्क की रिपोर्ट।
