तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध की चिंगारी अब वैश्विक आर्थिक संकट में बदलती दिख रही है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर 20 लाख डॉलर (करीब 18.8 करोड़ रुपये) का भारी ‘ट्रांजिट शुल्क’ लगाने का ऐलान किया है। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव का नतीजा माना जा रहा है।
ईरान की दोटूक: “यह हमारी ताकत का परिचय है”
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाउद्दीन बोरूजेरदी ने सरकारी चैनल IRIB पर इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह शुल्क लेना इस रणनीतिक रास्ते पर ईरान के मजबूत नियंत्रण को दर्शाता है। बोरूजेरदी के अनुसार, युद्ध की स्थिति में रक्षा खर्च बढ़ जाता है, जिसकी भरपाई के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।
ट्रंप की चेतावनी बनाम ईरान का पलटवार
इस फैसले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है:
- डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम: अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर यह समुद्री रास्ता पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट्स पर हमला कर सकता है।
- ईरान का जवाब: ईरान ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो इजरायल के ऊर्जा ठिकानों को 24 घंटे के भीतर मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि ईरान विरोधियों की धमकियों से झुकने वाला नहीं है।
क्यों अहम है ‘होर्मुज की खाड़ी’?
दुनिया के लिए यह रास्ता किसी लाइफलाइन से कम नहीं है क्योंकि:
- वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
- अगर ईरान इस रास्ते को पूरी तरह बंद करता है, तो कच्चा तेल $150 प्रति बैरल के पार जा सकता है।
- वर्तमान में तनाव के कारण टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिससे वैश्विक व्यापार ठप होने की कगार पर है।
संपादकीय: भारत पर क्यों बढ़ा महंगाई का खतरा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (पेट्रोल-डीजल) के लिए मध्यपूर्व के देशों पर निर्भर है। इस संकट का सीधा असर भारतीय मध्यम वर्ग पर पड़ेगा:
- महंगा पेट्रोल-डीजल: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से घरेलू बाजार में ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं।
- सप्लाई चेन प्रभावित: समुद्री रास्ता असुरक्षित होने से आयात-निर्यात महंगा होगा, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
- शेयर बाजार में अस्थिरता: युद्ध की आशंका से भारतीय शेयर बाजार पहले ही गोता लगा चुका है।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क
