जमशेदपुर (बिष्टुपुर): लौहनगरी का सबसे व्यस्त इलाका बिष्टुपुर इन दिनों ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में चल रही ‘खुली मंडी’ के लिए चर्चा में है। यहाँ कानून की धज्जियाँ सड़क पर नहीं, बल्कि ट्रैफिक पोस्ट के भीतर उड़ाई जा रही हैं। वायरल वीडियो और स्थानीय शिकायतों ने बिष्टुपुर ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानून या सब्जी मंडी? ₹2000 की ‘डील’ ₹200 में फिक्स
बिष्टुपुर से सामने आ रहे दृश्यों ने सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे भारी-भरकम जुर्माने का डर दिखाकर जनता से सौदेबाजी की जा रही है। ₹2000 से शुरू होने वाली ‘जुर्माने की बातचीत’ महज ₹200-300 की रिश्वत पर आकर खत्म हो जाती है। ऐसा लगता है जैसे बिष्टुपुर की सड़कों पर मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का ‘सौदा पत्र’ चल रहा है।
चर्चा में दो नाम: अधिकारी सरोज सिंह और सिपाही विकास झा
इस पूरे प्रकरण में दो नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहे हैं। आरोपों के घेरे में पुलिस अधिकारी सरोज सिंह और उनके कथित आदेश पर ‘पैसे की सेटिंग’ करते दिख रहे सिपाही विकास झा हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन निचले स्तर के कर्मियों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? या फिर शहर की नाक के नीचे यह गोरखधंधा बिना किसी डर के फल-फूल रहा है?https://youtube.com/shorts/j0t6qXOdbTI?si=g3ris4hQul_jLeyB
वर्दी पर दाग: न्याय नहीं, अब सौदेबाजी का प्रतीक?
जनता से उम्मीद की जाती है कि वे हेलमेट पहनें, कागजात दुरुस्त रखें और नियमों का पालन करें। लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो नियम किसके लिए?
- क्या वर्दी अब न्याय दिलाने के बजाय जेब भरने का जरिया बन गई है?
- क्या बिष्टुपुर ट्रैफिक पुलिस के लिए कानून महज एक ‘मंडी’ का सामान है जिसे कम-ज्यादा करके बेचा जा सकता है?
जनता में आक्रोश: क्या होगी कार्रवाई?
सोशल मीडिया पर #BistupurPoliceCorruption और #KanoonBikGaya जैसे हैशटैग के साथ लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। शहर के प्रबुद्ध नागरिक अब जिला प्रशासन और एसएसपी से मांग कर रहे हैं कि आरोपी कर्मियों पर त्वरित जांच बैठाकर उन्हें सस्पेंड किया जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़
