जमशेदपुर: लौहनगरी में सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही बिजली की आंख-मिचौली का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। गर्मी के शुरुआती दिनों में ही दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DBC) के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। हर साल की तरह इस बार भी डीबीसी प्रबंधन ने व्यवस्था में सुधार और निर्बाध बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कागजी वादे और जमीनी हकीकत
आलम यह है कि गैर-टिस्को क्षेत्रों में रहने वाली एक बड़ी आबादी को भीषण बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। डीबीसी की ओर से अक्सर यह आश्वासन दिया जाता है कि गर्मियों में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होगी, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये वादे सिर्फ फाइलों और अखबारों तक ही सिमट कर रह गए हैं।
छात्रों की पढ़ाई और नींद पर असर
बिजली की इस अनियमितता का सबसे बुरा असर बच्चों और छात्रों पर पड़ रहा है। रात के समय होने वाली अघोषित कटौती के कारण बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। भीषण गर्मी और मच्छरों के प्रकोप के बीच रातें गुजारना दूभर हो गया है, जिसका सीधा असर अगले दिन उनके स्कूल जाने और पढ़ाई की एकाग्रता पर पड़ रहा है। अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष व्याप्त है।
नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल
बिजली की इस गंभीर समस्या पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं की चुप्पी ने जनता को और भी आहत किया है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े वादे करने वाले नेताओं को जनता की यह तकलीफ नजर नहीं आ रही है। क्या वे इस समस्या से अनजान हैं या जानबूझकर इस ओर से अपना मुंह फेर रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
जमशेदपुर के गैर-टिस्को क्षेत्रों की जनता अब प्रशासन और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है ताकि उन्हें इस भीषण गर्मी में बिजली कटौती से राहत मिल सके।
तीसरी धारा न्यूज
