जमशेदपुर : कुड़मी समाज द्वारा अपनी संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से आज डहरे टुसु परब का आयोजन किया गया. इस दौरान आदित्यपुर कांड्रा मुख्य मार्ग पर जन सैलाब देखने को मिला. आदित्यपुर कांड्रा मुख्य मार्ग पर टोल ब्रिज मोड़ से लेकर खरकई पुल तक यह नजारा देखने को मिला, जहां अलग अलग स्थानों से आए महिला – पुरुष और युवक – युवती अलग अलग समूह में पूरे उल्लास के साथ झूमते और नाचते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे.
इस दौरान मुख्य मार्ग के अलग अलग स्थानों पर डहरे टुसू में शामिल लोगों के स्वागत के लिए शिविर भी लगाया गया था. इस क्रम में समाजसेवी बादल महतो के नेतृत्व में फुटबॉल मैदान, आदित्यपुर के पास आहूत शिविर के माध्यम से चना, पानी और चाय का वितरण भी किया गया. संपर्क करने पर बादल महतो ने डहरे टुसु को झारखंडी सभ्यता संस्कृति का परिचायक बताया. उन्होंने कहा कि डहरे टुसू की शुरुआत टुसू पर्व से पूर्व की जाती है. टुसू पर्व तक लोग नई फसल के स्वागत में खेत_खलिहान में नाचते झूमते हैं और अब यह परंपरा गांव से शहर की ओर आ रही है, जिसका हम सभी को स्वागत करना चाहिए.
सुनील महतो के समाधि स्थल से हुई डहरे टुसू की शुरुआत
वहीं, पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत कुड़मी समाज के आह्वान पर दिवंगत सांसद सुनील महतो के गम्हरिया स्थित समाधि स्थल से निकले डहरे टुसू में शामिल महिला पुरुष ढोल और मांदर की थाप पर लोग थिरकते दिखे. जबकि डहरे टुसू में शामिल महिलाएं कुड़माली संगीत और डीजे की धुन पर थिरकती दिखी. कुड़मी समाज के प्रखर नेता (कांड्रा निवासी) विजय महतो ने बताया कि सभ्यता और संस्कृति का बचाव करने के उद्देश्य से डहरे टुसू का आयोजन किया गया है.
