जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद अब राजभवन पर निगाहें टिक गई हैं। हेमंत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद महागठबंधन ने चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया है।
इसके बाद चंपई ने 43 विधायकों के साथ सरकार बनाने का दावा भी पेश किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक राजभवन ने शपथ ग्रहण का कोई समय नहीं दिया है। ऐसे में अब निगाहें राजभवन पर है कि आगे क्या होगा। वहीं इन सबको लेकर रांची में सियासी हलचल भी तेज हो गयी है। सभी दलों के वरीय नेता रांची में कैंप किए हुए हैं। गुरुवार को भी कई नेताओं के पहुंचने की संभावना है।
चंपई ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा किया। राज्यपाल से मुलाकात के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि राज्यपाल ने अभी कुछ नहीं कहा है। वहीं चंपई ने बताया कि राज्यपाल ने कहा कि बताएंगे। विधायक प्रदीप यादव ने भी स्पष्ट किया कि हमने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उधर, निर्दलीय विधायक सरयू राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हेमंत का त्यागपत्र राज्यपाल द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद झारखंड में कोई मुख्यमंत्री नहीं है। कोई सरकार नहीं है। राज्य में संवैधानिक संकट है।
इधर, राज्य के सियासी हालात पर भाजपा भी नजर जमाए हुई है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी बुधवार की रात रांची पहुंचे। रांची पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने जो किया, वही भरेंगे। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को भाजपा के प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी सभी जिलाध्यक्षों व प्रभारियों के साथ बैठक करेंगे। उधर, गुरुवार को भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष के भी रांची पहुंचने की संभावना है।
विधायकों को झारखंड से बाहर ले जाया जा सकता है
महागठबंधन घटक दल झामुमो, कांग्रेस और राजद के विधायक सर्किट हाउस में कैंप कर रहे हैं। राजभवन से देर रात सीधे सभी को सर्किट हाउस लाया गया। हॉर्स ट्रेडिंग की संभावना से लेकर पार्टियों को टूटने से बचाने के लिए विधायकों को झारखंड से बाहर भी ले जाया जा सकता है। सभी विधायकों का अल्टरनेट मोबाइल के साथ साजो-सामान मंगा लिया गया है। इन्हें झारखंड से बाहर तेलंगाना या पश्चिम बंगाल शिफ्ट करने की भी तैयारी है।
संवैधानिक संकट के हालात नहीं
हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और किसी के कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं किए जाने की स्थिति कुछ दिन रह सकती है। इसे संवैधानिक संकट नहीं माना जा सकता। विधि विशेषज्ञ और पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार के अनुसार हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद महागठबंधन ने नया नेता का चयन कर लिया है। नए नेता ने सरकार बनाने का अपना दावा अपने समर्थक विधायकों के साथ पेश कर दिया है। यदि दावा पेश करने वाले के पास बहुमत है तो राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने को बाध्य हैं। इसके लिए राज्यपाल एक-दो दिन का समय ले सकते हैं। इस दौरान राज्य के मुख्य सचिव राज्यपाल के निर्देश पर काम करेंगे। राज्यपाल के आदेश से ही सरकार के सभी काम निष्पादित होते हैं। ऐसे में राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति नहीं हो सकती है।

