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सुरक्षा घेरा तोड़ अपनों के बीच पहुंचीं राष्ट्रपति, काफिला रुकवाकर बच्चों को दुलारा

घड़ी की सुइयां शाम के 3.45 बजा रही थीं। एनआइटी के दीक्षा समारोह से लौटते वक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अचानक आदित्यपुर और खरकई ब्रिज के बीच अपना काफिला रुकवा दिया।प्रोटोकॉल और कड़े सुरक्षा घेरे की परवाह किए बगैर वे गाड़ी से उतरीं और घंटों से इंतजार कर रहे आम लोगों के बीच जा पहुंचीं।

राष्ट्रपति को अपने करीब पाकर जनता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सोमवार की शाम जमशेदपुर के इतिहास में एक भावुक अध्याय के रूप में दर्ज हो गई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एनआइटी के कार्यक्रम के बाद वापस लौट रही थीं। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप और उमस की परवाह किए बिना अपनी ”दीदी” और देश की राष्ट्रपति की एक झलक पाने को बेताब थे। लोगों को उम्मीद थी कि वे केवल हाथ हिलाते हुए गुजर जाएंगी, लेकिन जो हुआ, उसने सभी को अचंभित कर दिया।

अचानक थमे पहिए, और सड़क पर उतरीं राष्ट्रपति

जैसे ही काफिला खरकई ब्रिज के पास पहुंचा, राष्ट्रपति ने गाड़ी रोकने का इशारा किया। सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते, इससे पहले ही द्रौपदी मुर्मू कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गईं। उनके चेहरे पर वही पुरानी सौम्य मुस्कान थी।

उन्होंने सड़क के दोनों किनारों पर खड़े लोगों के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। वे बैरिकेडिंग के बिल्कुल करीब पहुंचीं और बुजुर्गों से उनका हाल-चाल पूछा।

लगा जैसे घर की कोई बड़ी बुजुर्ग मिल रही हों

भीड़ में मौजूद साकची की रहने वाली कॉलेज छात्रा रिया अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थीं। राष्ट्रपति को देख उनकी आंखें नम हो गईं। रिया ने कहा, हमने सोचा था सिर्फ गाड़ी दिखेगी, लेकिन वे तो हमारे पास आ गईं।

मैंने उन्हें नमस्ते किया तो उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया। लगा ही नहीं कि वे देश की राष्ट्रपति हैं, लगा घर की कोई बड़ी बुजुर्ग हैं। वहीं, अपनी मां की गोद में बैठे आठ साल के आरव ने खुशी से उछलते हुए कहा, मैम ने मुझे हाथ हिलाया। मैंने टीवी पर देखा था, आज सच में देख लिया।

सुरक्षाकर्मियों के फूले हाथ-पांव

राष्ट्रपति का यह अंदाज जनता के लिए जितना सुखद था, सुरक्षाकर्मियों के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण। जैसे ही राष्ट्रपति भीड़ की ओर बढ़ीं, एसपीजी और जिला पुलिस के जवानों के हाथ-पांव फूल गए। वे तत्काल सुरक्षा घेरा (रिंग) बनाने की कोशिश करने लगे, लेकिन लोगों के प्यार से अभिभूत राष्ट्रपति सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना आगे बढ़ती रहीं।

वे बच्चों के सिर पर हाथ फेर रही थीं और महिलाओं का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं। राष्ट्रपति की इस आत्मीयता को देख भीड़ का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

गूंज उठे भारत माता की जय के नारे

पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और द्रौपदी मुर्मू जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। कुछ युवतियों ने मोबाइल से इस पल को कैद किया। जुगसलाई की स्नेहा ने कहा, ‘हम तीन घंटे से खड़े थे, पैर दुख रहे थे।

लेकिन जब महामहिम ने कार रोककर हमें देखा, तो सारी थकान मिट गई। यह उनका बड़प्पन है कि वे अपनी जड़ों और अपने लोगों को नहीं भूली हैं। करीब पांच से सात मिनट तक लोगों के बीच रहने के बाद राष्ट्रपति वापस अपनी कार में बैठीं और काफिला आगे बढ़ गया, लेकिन वे अपने पीछे छोड़ गईं कभी न भूलने वाली सुनहरी यादें।

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