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छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरी भाजपा: JPSC-JSSC गड़बड़ी के विरोध में 11 अगस्त को ‘झारखंड बंद’ का आह्वान

तीसरी धारा न्यूज

रांची, 10 अगस्त 2026

​झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो चुका है। आंदोलनरत परीक्षार्थियों और युवाओं पर हुए पुलिस बल प्रयोग के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 11 अगस्त को राज्यव्यापी ‘झारखंड बंद’ का बड़ा ऐलान किया है। बंद का आह्वान सोमवार को रांची स्थित पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान किया गया, जिसकी अगुआई नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने की।

‘हेमंत सरकार की दमनकारी नीति बर्दाश्त नहीं’

​प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले कई सालों से JPSC और JSSC द्वारा आयोजित लगभग सभी भर्ती प्रक्रियाओं में भारी गड़बड़ियां देखने को मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी वाजिब मांगों को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतरे, तो सरकार ने उनसे बात करने के बजाय आंसू गैस, वाटर कैनन और बेरहमी से लाठीचार्ज करवाया।

​भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं और आंदोलन स्थल से उनका पंडाल तक हटा दिया गया।

CBI जांच और परीक्षाएं रद्द करने की मांग

​भाजपा ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों पर जोर देते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है:

11 अगस्त बंद का खाका: क्या खुला रहेगा और क्या बंद?

​भाजपा के मुताबिक, 11 अगस्त को सुबह 8:00 बजे से देर रात तक पूरे झारखंड में व्यापक बंद रखा जाएगा।

आपातकालीन और धार्मिक छूट:

आम जनता को होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय सेवाओं (अस्पताल, एम्बुलेंस, दवा दुकानें) को बंद से पूरी तरह मुक्त रखा है। इसके अलावा, श्रावणी मेले के तहत देवघर व अन्य धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के आवागमन पर बंद का कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

राजनीतिक तपिश बढ़ी

​सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बाबूलाल मरांडी समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं को हिरासत में भी लिया गया था। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने दमनकारी नीति बंद नहीं की और छात्रों की मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र रूप धारण करेगा। अब मंगलवार को होने वाले बंद का राज्य के जनजीवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और परिवहन पर कितना असर पड़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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