कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद राज्य की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। 60 से ज्यादा विधायकों के बाद अब टीएमसी के सांसदों ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, बगावत करने वाले टीएमसी के 19 सांसदों की पहली आधिकारिक लिस्ट भी सामने आ चुकी है।
हालांकि, बागी गुट का दावा था कि उनके साथ 20 से ज्यादा सांसद हैं, लेकिन फिलहाल सामने आई सूची में 19 सांसदों के नाम दर्ज हैं।
बागियों की नेता बनीं काकोली घोष, NDA को समर्थन का दावा
इस पूरे राजनीतिक विद्रोह की कमान बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार संभाल रही हैं। बागी सांसदों ने उन्हें अपना नेता चुना है। खबरों के अनुसार, 10 से ज्यादा बागी सांसदों ने कुछ दिनों पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी।
इसके बाद, लगभग 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की बात कही है। बागियों ने संसद में एक अलग गुट बनाने का भी दावा पेश किया है।
अपनी बगावत पर बोलते हुए काकोली घोष ने कहा:
”मैं ममता बनर्जी के साथ तब भी खड़ी थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। पहले की नीतियां बंगाल के गरीबों के भले के लिए थीं, लेकिन पिछले 3-4 सालों से उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो रहा था।”
इन 19 बागी सांसदों के नाम आए सामने:
सामने आई लिस्ट में बंगाल के कई कद्दावर और चर्चित चेहरों के नाम शामिल हैं:
- काकोली घोष (बारासात) – बागी गुट की नेता
- जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
- खली उर रहमान (जंगीपुर)
- यूसुफ पठान (बेहरामपुर)
- अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
- पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
- बापी हलधर (मथुरापुर)
- सयोनी घोष (जादवपुर)
- माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
- मिताली बाग (आरामबाग)
- दीपक अधिकारी – देव (घाटल)
- कालीपद सोरेन (झालग्राम)
- जून मालिया (मेदिनीपुर)
- अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
- डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व)
- शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
- असित कुमार मल (बोलपुर)
- शताब्दी रॉय (बीरभूम)
- रचना बनर्जी (हुगली)
सयोनी घोष का नाम सबसे हैरान करने वाला
इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम जादवपुर की सांसद सयोनी घोष का है। बंगाल चुनाव के दौरान सयोनी अपनी आक्रामक बयानबाजी और रैलियों के कारण पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई थीं। राजनीतिक गलियारों में तो उन्हें ममता बनर्जी का भविष्य का विकल्प तक माना जाने लगा था।
साल 2021 में टीएमसी जॉइन करने वाली सयोनी भले ही अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन उनके तेवर देखते हुए अभिषेक बनर्जी ने उन्हें टीएमसी यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। ऐसे में उनका बागी गुट में जाना ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा निजी झटका माना जा रहा है।
यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा भी खेमे से बाहर
ममता बनर्जी को झटका देने वालों में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हैं।
- शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल): बीजेपी और कांग्रेस का सफर तय करने के बाद मार्च 2022 में टीएमसी में आए थे। 2022 के उपचुनाव और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल से टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
- यूसुफ पठान (बेहरामपुर): यूसुफ ने अपने सियासी सफर की शुरुआत ही टीएमसी से की थी। 2024 के चुनाव में उन्होंने बहरामपुर सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को 85 हजार से अधिक वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था, लेकिन अब उन्होंने भी बगावत का रास्ता चुन लिया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए इस भूचाल ने अब दिल्ली तक की हलचल बढ़ा दी है। देखना होगा कि ममता बनर्जी इस सबसे बड़े संकट से अपनी पार्टी को कैसे बचा पाती हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
