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झारखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश, 12 मासूम बरामद

रांची: झारखंड में सक्रिय बच्चा चोरों के एक खूंखार नेटवर्क के खिलाफ रांची पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। धुर्वा के चर्चित ‘अंश और अंशिका’ अपहरण कांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने न केवल दोनों बच्चों को सुरक्षित वापस पाया, बल्कि बाल तस्करी के एक विशाल सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अब तक कुल 12 अपहृत बच्चों को बरामद किया है और इस मामले में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

तीन राज्यों में फैला था तस्करी का जाल

​एसएसपी रांची, राकेश रंजन के अनुसार, इस गैंग की जड़ें केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं थीं। बरामद किए गए बच्चों में:

​जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार छत्तीसगढ़ से भी जुड़े हुए हैं, जिसके लिए रांची पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क साध रही है।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

​पुलिस पूछताछ में मास्टरमाइंड विरोधी खेरवार उर्फ अनुराग ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था:

  1. रेकी: पहले गरीब और असहाय बच्चों की पहचान की जाती थी।
  2. लालच: बच्चों को खाने-पीने की चीजें या घूमने का लालच देकर बहलाया-फुसलाया जाता था।
  3. अपहरण और बिक्री: मौका मिलते ही बच्चों को उठाकर दूसरे राज्यों (जैसे बिहार और बंगाल) में बेच दिया जाता था।

पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी

​गिरफ्तार किए गए 15 लोगों में 8 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं। मुख्य आरोपियों की सूची इस प्रकार है:

SIT की मुस्तैदी और मुख्यमंत्री की निगरानी

​इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस मामले की सीधी निगरानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी तदाशा मिश्रा द्वारा की जा रही थी। 14 जनवरी को नभ खेरवार की गिरफ्तारी के बाद कड़ियां जुड़ती गईं और सिल्ली, रामगढ़ एवं लातेहार में ताबड़तोड़ छापेमारी कर मासूमों को मुक्त कराया गया।

एसएसपी की अपील: “हमने 12 बच्चों को सकुशल बचा लिया है, लेकिन जांच अभी जारी है। हमें अंदेशा है कि यह नेटवर्क और भी गहरा हो सकता है। जनता से अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।”

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