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झारखंड स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: सरकारी अस्पतालों में फर्जी बिलिंग के खेल पर कसेगा शिकंजा, PPP मोड की सेवाओं की होगी सघन जांच

रांची/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​झारखंड के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित रेडियोलॉजी सेवाओं (एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को निजी एजेंसियों द्वारा जमा किए गए बिलों के ऑडिट का सख्त आदेश दिया है।

​एक सप्ताह में मांगी गई ‘स्क्रूटनी’ रिपोर्ट

​स्वास्थ्य निगम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिम्स (रांची), एमजीएम (जमशेदपुर), और शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज (धनबाद) सहित सभी जिलों के सिविल सर्जनों को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच के 3 मुख्य आधार:

  1. मरीज का भौतिक सत्यापन: क्या बिल में दर्ज मरीज वास्तव में अस्पताल की ओपीडी या आईपीडी (भर्ती) का हिस्सा था?
  2. डाटा मिलान: जांच की तारीख, रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट की प्रमाणिकता का क्रॉस-वेरिफिकेशन।
  3. वैधता की जांच: क्या एजेंसियां वर्तमान में सक्रिय और वैध एग्रीमेंट के तहत सेवाएं दे रही हैं?

​जमशेदपुर एमजीएम: बिना वैध करार के चल रहा सेंटर

​जांच के घेरे में जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल सबसे प्रमुखता से उभरा है। यहाँ रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही एजेंसी ‘हेल्थमैप’ का करार पिछले महीने ही समाप्त हो चुका है।

​अस्पताल प्रबंधन द्वारा काम रोकने के निर्देश के बावजूद सेंटर का संचालन जारी है। एजेंसी का दावा है कि सरकार के साथ नया करार हो चुका है, लेकिन एमजीएम प्रशासन ने किसी भी आधिकारिक लिखित आदेश मिलने से इनकार किया है। यह स्थिति सरकारी तंत्र में समन्वय की कमी और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।

​सख्त कार्रवाई की चेतावनी

​स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा संदेश दिया है कि केवल उन्हीं जांचों का भुगतान किया जाएगा जो वास्तविक रूप से मरीजों के लिए की गई हैं। फर्जी, गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए बिलों के मामले में भुगतान रोकने के साथ-साथ संबंधित निजी एजेंसियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जांच में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।

​”हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सीधे गरीबों के इलाज के लिए हो, न कि निजी लाभ के लिए। किसी भी तरह की बिलिंग गड़बड़ी पर एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।” — विभाग के वरिष्ठ अधिकारी

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