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झारखंड शराब घोटाले में ACB का ऐक्शन, 2 IAS अधिकारियों को भेजा नोटिस

झारखंड में प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए हुए शराब घोटाला मामले में एसीबी ने राज्य में उत्पाद सचिव रह चुके दो आईएएस अधिकारियों मनोज कुमार और मुकेश कुमार को नोटिस भेजा है। मामले में जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज होने के बाद पहले भी दोनों को नोटिस भेजा था।

झारखंड के शराब घोटाले में एसीबी ने पूर्व उत्पाद सचिव विनय चौबे को सबसे पहले गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि विनय चौबे की भूमिका पूरे घोटाले में केंद्रीय रही। उनके कार्यकाल में न एमजीआर की समीक्षा हुई न गारंटी की राशि वसूलने की कोशिश हुई। तब तक सरकार को 38 करोड़ का नुकसान हो चुका था। बाद में मनोज कुमार, मुकेश कुमार उत्पाद सचिव बने पर प्लेसमेंट एजेंसियों से वसूली नहीं हुई। यह इस बात का साफ संकेत है कि निजी कंपनियों को जानबूझकर फायदा पहुंचाया गया।

आलमगीर के पीएस की पत्नी समेत आठ और पर चार्जशीट

ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर में कमीशनखोरी से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में ईडी ने चौथी पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इसमें ठेकेदार, प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोगी और उनके परिवार के लोगों को आरोपी बनाया गया। इसमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल की पत्नी रीता लाल का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या 22 हो गई है।

दरअसल, ईडी की यह जांच एसीबी जमशेदपुर द्वारा दर्ज एक प्रिडिकेट ऑफेंस पर आधारित है। नवंबर 2019 में विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुरेश वर्मा को रिश्वत लेते पकड़ा गया था, तब विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम से जुड़े ठिकानों से ₹2.67 करोड़ कैश मिले थे। जांच में सामने आया था कि ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम कथित तौर पर निविदाओं पर एक निश्चित कमीशन लेते थे। यह कमीशन उनके निजी सचिव संजीव लाल और उनके सहयोगियों द्वारा वसूला जाता था। सिंडिकेट से जुड़े ठिकानों की तलाशी में ₹37 करोड़ से अधिक कैश मिले थे। इस अवैध नकदी से बाद में दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एंट्री ऑपरेटरों के एक नेटवर्क के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की गई और इसका उपयोग कई महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया।

किसकी क्या रही है भूमिका

ठेकेदार राजेश कुमार और उनकी कंपनियों ने ₹1.88 करोड़ की रिश्वत व कमीशन के रूप में दो लग्जरी वाहन देने की बात कबूली। वहीं ठेकेदार राधामोहन साहू ने ₹39 लाख कैश और एक लग्जरी वाहन रिश्वत में देने की बात कबूली है। ये तीनों वाहन वीरेंद्र राम के कब्जे से मिले थे। वीरेंद्र राम के सहयोगी अतिकुल रहमान के परिसर से ₹4.40 लाख कैश मिले थे। वहीं बिचौलिए का काम करने वाले ठेकेदार राजीव कुमार सिंह के आवास से ₹2.13 करोड़ मिले थे। राजीव कुमार सिंह ने लगभग ₹15 करोड़ की कमीशन राशि जुटाने और संभालने की बात स्वीकार की है। संजीव लाल की पत्नी रीता लाल पर दागी धन को वैध आय के रूप में पेश करने का आरोप लगाया गया है।

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