तीसरी धारा न्यूज / जमशेदपुर:
IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक की मुख्य शाखा के बाहर महिला और पुरुष बैंक कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रस्तावित योजना का कड़ा विरोध जताया।
रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद निजीकरण का फैसला अनुचित: कर्मचारी
प्रदर्शन कर रहे बैंककर्मियों का कहना है कि आईडीबीआई बैंक को भारी घाटे और बढ़ते गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) जैसी गंभीर चुनौतियों से उबारकर रिकॉर्ड मुनाफे की स्थिति में लाने में बैंक के कर्मचारियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कर्मचारियों का तर्क है कि जब बैंक का वित्तीय प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है, ऐसे समय में इसका नियंत्रण निजी निवेशकों के हाथों में सौंपना पूरी तरह से अनुचित और तर्कहीन है।
सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग
कर्मचारियों ने निजीकरण की इस पूरी प्रस्तावित प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और केंद्र सरकार से इस फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि बैंक का भविष्य केवल व्यावसायिक लाभ कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों कर्मचारियों के भविष्य, उनके हितों और देश की मजबूत सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। अब देश भर के साथ-साथ जमशेदपुर में भी शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार कर्मचारियों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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