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यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: सिगरेट की चिंगारी से स्लीपर बस में लगी आग, 9 यात्री जिंदा जले; परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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तीसरी धारा न्यूज         |         25 सितंबर 2026         |         ग्रेटर नोएडा

​केबिन में सिगरेट और चालक की घोर लापरवाही

नोएडा से महोबा जा रही स्लीपर एसी बस में यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास अचानक भीषण आग लग गई। जेवर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह बस कर्मियों की लापरवाही रही। केबिन में बैठकर चालक और अन्य कर्मी सिगरेट पी रहे थे, जिससे उठी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। यात्रियों के मना करने और चीख-पुकार मचाने के बावजूद चालक ने बस नहीं रोकी और अभद्रता करता रहा। जब पूरी बस धुएं से घिर गई, तब जाकर गाड़ी रोकी गई, जिसके बाद जान बचाने के लिए बदहवास यात्री खिड़कियां तोड़कर बाहर कूदने लगे।

​रेस्क्यू के दौरान दिखा रोंगटे खड़े करने वाला मंजर

करीब दो घंटे तक तांडव मचाने वाली आग पर जब काबू पाया गया, तो बचाव दल ने कटर से बस का पिछला हिस्सा काटकर भीतर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था; तीन यात्रियों की झुलसी हुई चमड़ी सीटों से चिपकी मिली और कई शव फर्श व गैलरी में क्षत-विक्षत पड़े थे। रेस्क्यू टीम को एक-एक शव बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई मृतकों के सीने और पैरों से पिघले हुए मोबाइल फोन चिपके मिले, जिससे हादसे की विभीषिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।

​ज्वलनशील सामान से फैली आग, डीएनए जांच से होगी शिनाख्त

जांच के दौरान बस की डिग्गी से एक सिलेंडर और भारी मात्रा में नेल पॉलिश बरामद हुई है। माना जा रहा है कि इन ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण ही आग इतनी तेजी से पूरी बस में फैल गई। हादसे में जान गंवाने वाले 9 लोगों के शव इस कदर जल चुके हैं कि उनकी सामान्य पहचान असंभव हो गई है। पुलिस व प्रशासन के अनुसार अब डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग के जरिए ही मृतकों की आधिकारिक शिनाख्त कराई जाएगी, जिसके बाद ही अवशेष उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे।

​अपनों की तलाश में बिलखते स्वजन और घायलों की आपबीती

नोएडा के पोस्टमार्टम हाउस और अस्पतालों में हादसे के शिकार लोगों के परिजन अपनों की एक खबर पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। हादसे में जान गंवाने वाली अकेली महिला ऊषा देवी की पहचान उनकी नातिन आयुषी ने केवल एक पायल देखकर की। वहीं अस्पताल में भर्ती घायल रेखा भारद्वाज ने रोते हुए बताया कि भगदड़ के दौरान उनके पति देवेंद्र पैर में फ्रैक्चर होने के कारण आग की लपटों के बीच ही फंसे रह गए। कई परिवार अब भी अपने लापता स्वजनों के लिए किसी चमत्कार की आस लगाए बैठे हैं।

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