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दवाओं के खेल में लुट रहे मरीज: जमशेदपुर में एक ही दवा की कीमत में ₹4,200 का बड़ा अंतर सामने आया

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तीसरी धारा न्यूज    23 सितंबर 2026   जमशेदपुर

​टीएमएच के सामने मांगी भारी रकम, साकची में आधे दाम में मिली दवा

जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में भर्ती एक गंभीर मरीज के परिजनों को देर रात दवा की किल्लत और मनमाने दामों का सामना करना पड़ा। टीएमएच में इलाजरत मरीज के लिए जीवनरक्षक दवा खरीदने निकले परिजनों से अस्पताल के ठीक सामने स्थित एक मेडिकल स्टोर पर करीब 9,500 रुपये की मांग की गई। जब परिजन इतनी अधिक कीमत सुनकर हैरान रह गए और दवा की तलाश में साकची के दूसरे मेडिकल स्टोर पहुंचे, तो वही दवा उन्हें महज 5,300 रुपये में मिल गई। एक ही दवा के लिए दो अलग-अलग दुकानों पर करीब 4,200 रुपये का अंतर सामने आने से हड़कंप मच गया है।

​एमआरपी का खेल: मजबूरी का फायदा उठाने का लगा आरोप

परिजनों के अनुसार, दवा के पैकेट पर कुल एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) 9,749.88 रुपये दर्ज थी। देर रात आपातकालीन स्थिति होने के कारण परिजनों ने सबसे पहले टीएमएच के सामने स्थित दुकान का रुख किया। वहां दुकानदार ने दवा तुरंत उपलब्ध न होने की बात कहकर उसे मंगाने का आश्वासन दिया और 9,500 रुपये की मांग की। इलाज की मजबूरी और आर्थिक तंगी के बीच परिजनों ने तुरंत साकची बाजार का रुख किया, जहां उन्हें वही दवा ₹4,200 सस्ती मिल गई। इस घटना ने शहर के मेडिकल स्टोरों द्वारा मजबूरी में वसूले जाने वाले मनमाने दामों की पोल खोलकर रख दी है।

​दस्तावेजों और बिलों की जांच से ही सामने आएगा पूरा सच

दवा की कीमत में इतना बड़ा अंतर आने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अस्पताल के बाहर स्थित दुकानें मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रही हैं। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दोनों मेडिकल स्टोरों के खरीद-बिक्री बिल, दवा के बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स और सप्लाई रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह अंतर भारी डिस्काउंट का नतीजा है या इसके पीछे नकली/समान साल्ट वाली दवाओं और मुनाफाखोरी का कोई बड़ा खेल चल रहा है।

​मरीज के परिजनों ने उठाई पारदर्शिता और जांच की मांग

अस्पताल में अपनों के इलाज से जूझ रहे परिजनों के लिए ऐसी घटनाएं न केवल मानसिक तनाव बढ़ाती हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी तोड़ देती हैं। पीड़ित परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से दवाओं की बिक्री और कीमतों में पारदर्शिता लाने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जीवनरक्षक दवाओं के दामों पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि मजबूरी के वक्त मरीजों के तीमारदारों से मनमानी लूट न हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले के बिलों की जांच कर क्या ठोस कदम उठाता है।

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