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DC के आदेश भी बेअसर: बर्मामाइंस में नो एंट्री के समय दौड़ रहे भारी वाहन, हादसों से क्षेत्र में दहशत

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तीसरी धारा न्यूज   |   20 सितंबर 2026   |   बर्मामाइंस

लगातार हादसों से सहमे स्थानीय लोग

बर्मामाइंस और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रहे जानलेवा हादसों के कारण क्षेत्रवासियों में खौफ और भारी आक्रोश का माहौल है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं ने न सिर्फ आम जनता की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि जिला प्रशासन की नींद भी उड़ा दी है।

उपायुक्त का कड़ा रुख और सख्त निर्देश

गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) ने त्वरित कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाते हुए टाटा स्टील के अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। आदेश में साफ कहा गया था कि निर्धारित ‘नो एंट्री’ की समय सीमा के भीतर क्षेत्र की सीमाओं में किसी भी भारी वाहन का प्रवेश या परिचालन नहीं होना चाहिए।

धरातल पर नियमों की उड़ी धज्जियां

उपायुक्त के इन सख्त आदेशों और निर्देशों के बावजूद धरातल पर स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। प्रशासन के दावों को ठेंगा दिखाते हुए बर्मामाइंस की प्रमुख सड़कों पर नो एंट्री के समय भी भारी वाहनों, ट्रकों और टेलरों की बेधड़क आवाजाही धड़ल्ले से जारी है। ऐसा प्रतीत होता है कि आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

प्रशासनिक लापरवाही से मंडराता खतरा

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नो एंट्री जोन में नियमों की अनदेखी रोकने के लिए न तो ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद दिख रही है और न ही संबंधित विभाग कोई ठोस कार्रवाई कर रहे हैं। भारी वाहनों के इस प्रकार अवैध प्रवेश से हर पल बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ी हुई है।

कागजी आदेश या होगी ठोस कार्रवाई?

अब बर्मामाइंस की जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन आखिर कब जागेगा? क्या जिला प्रशासन नो एंट्री के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों, ट्रांसपोर्टरों और बेपरवाह चालकों पर कोई कड़ा रुख अपनाएगा, या फिर बर्मामाइंस वासियों की सुरक्षा को यूं ही राम भरोसे छोड़ दिया जाएगा?

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