तीसरी धारा न्यूज | 18 सितंबर 2026 | नई दिल्ली
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR फ्रेमवर्क
देश में डिजिटल पेमेंट और पैसे भेजने का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 15 अक्टूबर 2026 से कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है। सरकार और केंद्रीय प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इस नए नियम का आम उपयोगकर्ताओं की जेब पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा और आम यूजर्स के लिए मुख्य सेवाएं पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगी।
P2P ट्रांसफर और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
नए दिशानिर्देशों के तहत आम जनता को राहत देने के लिए 7 प्रमुख श्रेणियों में पूरी तरह से जीरो MDR की व्यवस्था रखी गई है:
- व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर: दोस्तों, रिश्तेदारों या परिवार के सदस्यों को पैसे भेजने और रिसीव करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
- 2,000 रुपये तक का मर्चेंट पेमेंट: रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए दुकानदारों को किया जाने वाला 2,000 रुपये तक का भुगतान पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेगा। इससे लगभग 96% P2M ट्रांजेक्शन प्रभावित नहीं होंगे।
- छोटे दुकानदारों के लिए रियायत: P2PM कैटेगरी में आने वाले छोटे कारोबारी, जो प्रति माह UPI QR से 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए जीरो MDR लागू रहेगा।
- UPI AutoPay फ्री: OTT सब्सक्रिप्शन, बिजली-पानी के बिल और रेगुलर रिकरिंग पेमेंट्स पर अलग से कोई अतिरिक्त MDR नहीं जोड़ा जाएगा।
जरूरी सेवाओं और पैसे रिसीव करने पर भी छूट बरकरार
5. जरूरी सेवाओं में भुगतान: रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि सेक्टर में 2,000 रुपये तक के पात्र UPI भुगतानों को MDR से बाहर रखा गया है।
6. 2,000 रुपये से कम की सामान्य खरीदारी: किसी भी मर्चेंट से सामान या सेवा लेते समय 2,000 रुपये से कम के UPI भुगतान पर ग्राहकों से कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाएगा।
7. बैंक खाते में पैसे प्राप्त करना: अपने बैंक अकाउंट में किसी से भी UPI द्वारा रकम प्राप्त करने पर कोई चार्ज देय नहीं होगा।
ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता MDR का बोझ
सरकार ने स्पष्ट हिदायत दी है कि MDR एक मर्चेंट शुल्क है और इसे ग्राहकों से अतिरिक्त फीस के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या किसी भी तरह का हिडन (छिपा हुआ) चार्ज लेने से सख्ती से रोका गया है। आगामी 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इन नियमों से आम नागरिकों की डिजिटल बैंकिंग पहले की तरह सुलभ बनी रहेगी।
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