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कानपुर कचहरी में सनसनी: 23 वर्षीय वकील ने 5वीं मंजिल से कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में पिता पर लगाए प्रताड़ना के गंभीर आरोप

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर कचहरी परिसर में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हुआ। पिता के कथित मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर 23 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट की नई बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम से पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप स्टेटस पर दो पन्नों का भावुक सुसाइड नोट साझा किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।n7097588781777040129002b43dd3b18ec616731070b908769f0b595070f1856e35bd8f9a65f57b64c7c9da

​कचहरी परिसर में मचा हड़कंप

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे प्रियांशु नई बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज में वह फोन पर बात करते हुए दिखाई दिया और उसके तुरंत बाद उसने नीचे छलांग लगा दी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

​“मैं हार गया, पापा जीत गए” – सुसाइड नोट के झकझोर देने वाले बोल

​प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन से लेकर अब तक के मानसिक टॉर्चर की दास्तां बयां की है। उसने लिखा:

​“6 साल की उम्र में फ्रिज से जूस पीने पर मुझे निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया गया। हाईस्कूल के समय धमकी मिली कि नंबर कम आए तो फिर निर्वस्त्र कर भगा देंगे। हर मिनट शक की नजरों से देखना और हिसाब लेना… ऐसी बेगैरत जिंदगी जीने से बेहतर मर जाना है।”

 

​उसने अंत में भावुक अपील करते हुए लिखा, “सभी माता-पिता से निवेदन है कि बच्चों को उतना ही टॉर्चर करें जितना वे सह सकें। मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। मैं हार गया, पापा जीत गए। लव यू मम्मी…”

​पिता भी हैं वकील, पुलिस जांच में जुटी

​जांच में सामने आया है कि प्रियांशु के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी कानपुर में वकील हैं और प्रियांशु उन्हीं के साथ वकालत करता था। पुलिस अब सुसाइड नोट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि सभी साक्ष्यों को कब्जे में ले लिया गया है और परिजनों से पूछताछ की जा रही है।

​कानूनी जगत में शोक की लहर

​इस घटना ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं को झकझोर कर रख दिया है। एक उभरते हुए युवा वकील का इस तरह से अंत होना समाज और परिवार के भीतर बढ़ते मानसिक दबाव और संवादहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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