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चुनावी रण: बंगाल और असम के चुनावों में दिखा ‘झारखंड कनेक्शन’, आमने-सामने आए हेमंत सोरेन और हिमंता बिस्वा सरमा

रांची/कोलकाता: पड़ोसी राज्यों के विधानसभा चुनावों में झारखंड की सियासत का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। चाहे वह असम का चुनाव हो या पश्चिम बंगाल का, झारखंड के दिग्गज नेता अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जहां अपनी सरकार के मंत्रियों के साथ कैंप कर रहे हैं, वहीं भाजपा ने भी अपने स्टार प्रचारकों की पूरी फौज मैदान में उतार दी है। यूn70740662317754700882866866ddbf8665dbfececa57f63feff248f5d3ed47e33d58a5ba6075297a38900d

​असम में ‘आदिवासी कार्ड’ बनाम ‘झारखंड मॉडल’

​असम के चुनावी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आदिवासी समाज के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए 15 दिनों तक सघन अभियान चलाया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद वहां मोर्चा संभाले रहे।

​बंगाल में झारखंड भाजपा का ‘महाजुटान’

​पश्चिम बंगाल के चुनावों में भाजपा ने झारखंड के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। राज्य के 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता पिछले तीन महीनों से बंगाल में सक्रिय हैं।

​हिमंता बिस्वा सरमा का ‘झारखंड अनुभव’ आ रहा काम

​झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बतौर सह-प्रभारी करीब तीन महीने यहां बिताए थे। इस दौरान उन्होंने राज्य के जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया।

​सीधा कनेक्शन: हिमंता को झारखंड के कई कार्यकर्ताओं के नाम तक याद हैं। यही वजह है कि जब झारखंड के भाजपा कार्यकर्ता असम या बंगाल में प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, तो उन्हें हिमंता के साथ सीधे समन्वय का बड़ा लाभ मिल रहा है।

 

​निष्कर्ष

​साफ है कि झारखंड की राजनीति अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। आदिवासियों के मुद्दे और पड़ोसी राज्यों की भौगोलिक निकटता ने झारखंड के नेताओं को बंगाल और असम के चुनावों में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में ला खड़ा किया है।

​विशेष रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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