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चिटाही धाम: जहाँ रामनवमी पर अखाड़ा नहीं, बल्कि बदलता है ‘विशाल राम ध्वज’; जानें 100 साल पुराने मंदिर की महिमा

धनबाद/बाघमारा: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव ‘रामनवमी’ की गूंज पूरे देश में है, लेकिन कोयलांचल के धनबाद जिले में स्थित चिटाही धाम (रामराज मंदिर) अपनी अनूठी परंपराओं और भव्यता के लिए एक अलग पहचान रखता है। यहाँ की रामनवमी आस्था और भक्ति का ऐसा संगम पेश करती है, जिसे देखने दूर-दराज से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।n7056114081774254400656357756102692847ae544348b313abcfc9d242cc92b55f2fd5c963c2a5c9c7dd2

​एक पेड़ के नीचे से भव्य मंदिर तक का सफर

​चिटाही के रामराज मंदिर का इतिहास लगभग 100 वर्षों पुराना है। जानकारों के अनुसार, शुरुआत में यह मंदिर एक पेड़ के नीचे छोटे से स्वरूप में स्थापित था। स्थानीय लोगों की अटूट श्रद्धा ने धीरे-धीरे इसे एक बड़े धार्मिक केंद्र में बदल दिया। वर्ष 2019 में तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद ढुल्लू महतो के प्रयासों से करोड़ों की लागत से बने इस भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की गई, जिसके बाद इसकी ख्याति देशभर में फैल गई।

​अनोखी परंपरा: कलंकी अखाड़ा नहीं, ध्वज परिवर्तन

​जहाँ रामनवमी पर हर जगह अखाड़े और जुलूस की धूम रहती है, वहीं चिटाही धाम की परंपरा थोड़ी अलग और खास है। यहाँ रामनवमी के दिन ‘कलंकी अखाड़ा’ नहीं निकाला जाता। इसके स्थान पर मंदिर के शिखर पर लगे विशाल राम ध्वज को विधि-विधान के साथ बदला जाता है। इस दृश्य को देखना श्रद्धालुओं के लिए परम सौभाग्य माना जाता है।

​विशेष शृंगार और महाभंडारा

​रामनवमी के पावन अवसर पर प्रभु श्रीराम और माता सीता का दिव्य शृंगार किया जाता है। फूलों और रोशनी से नहाया मंदिर परिसर स्वर्ग सा प्रतीत होता है। पूजा-अर्चना के बाद यहाँ विशाल महाभंडारे का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं।

​मुख्य यजमान के रूप में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

​आयोजन की भव्यता में चार चाँद लगाने के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। मुख्य यजमान के रूप में धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो विशेष रूप से उपस्थित रहते हैं। उनकी उपस्थिति में होने वाली महाआरती आकर्षण का मुख्य केंद्र होती है।

​चिटाही धाम की खास बातें:

​हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि चिटाही धाम अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का अटूट स्तंभ बन चुका है।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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