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जमशेदपुर: घाघीडीह सेंट्रल जेल के 1600 बंदियों की होगी टीबी जांच, स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर

जमशेदपुर: शहर की घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। जेल में बंद करीब 1600 बंदियों में तपेदिक (टीबी) की आशंका को देखते हुए विभाग ने एक व्यापक जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा एक विशेष चिकित्सकीय टीम का गठन भी कर दिया गया है।Ghaghidih Jail

भीड़भाड़ वाले वातावरण में संक्रमण का खतरा

​जिला सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि जेल जैसे बंद और सीमित वातावरण में संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं। विशेषकर टीबी जैसी बीमारी, जो हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है, जेल परिसर में बड़ा खतरा बन सकती है। इसी सतर्कता के मद्देनजर सभी 1600 बंदियों की चरणबद्ध तरीके से स्क्रीनिंग की जाएगी।

जांच और इलाज की पुख्ता व्यवस्था

​इस अभियान की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

जेल प्रशासन का सहयोग

​घाघीडीह जेल अधीक्षक ने इस अभियान का स्वागत करते हुए कहा है कि जेल प्रशासन स्वास्थ्य टीम को पूरा सहयोग देगा। बंदियों की सूची तैयार कर ली गई है ताकि बिना किसी अव्यवस्था के व्यवस्थित ढंग से जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके। अक्सर जागरूकता की कमी के कारण बंदी बीमारी छिपाते हैं, जिसे दूर करने के लिए विशेष काउंसलिंग भी की जाएगी।

क्यों जरूरी है यह कदम?

​विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। जेल जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर एक भी संक्रमित व्यक्ति पूरी बैरक के लिए खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य विभाग का यह समयोचित निर्णय न केवल कैदियों की जान बचाएगा, बल्कि जेल परिसर के भीतर संक्रमण की श्रृंखला को भी तोड़ेगा।

तीसरी धारा न्यूज के लिए जमशेदपुर से रिपोर्ट।

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