जमशेदपुर | तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क
समाजसेवी और ‘फ्री लीगल एड कमेटी’ (FLAC) के अध्यक्ष प्रेमचंद जी के निधन से झारखंड के सामाजिक गलियारों में शोक की लहर है। समाजवादी चिंतक और वरीय अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे वंचितों, गरीबों और महिला वर्ग के लिए एक ऐसा नुकसान बताया है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है।

सुदूर गांवों तक पहुंचाया न्याय का प्रकाश
सुधीर कुमार पप्पू के अनुसार, प्रेमचंद जी ने फ्री लीगल एड कमेटी के माध्यम से अविभाजित पूर्वी सिंहभूम के उन दुर्गम क्षेत्रों में न्याय सुलभ करवाया, जहां पहुंचना नामुमकिन माना जाता था। उन्होंने न केवल लोगों को कानूनी सहायता दी, बल्कि ग्रामीणों को ‘स्वराज और स्वरोजगार’ के साथ-साथ सहकारिता का पाठ पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।
तीसरी धारा न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट: प्रेमचंद जी का सेवा सफर
- डायन प्रथा के खिलाफ बिगुल: उन्होंने इलाके की सबसे बड़ी कुरीति ‘डायन प्रथा’ को जड़ से मिटाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
- अधिकारों के रक्षक: वे नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे।
- त्याग की प्रतिमूर्ति: जेपी आंदोलन (JP Movement) के दौरान वे समाज सेवा से ऐसे जुड़े कि फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने समाज की खातिर अपने घर-परिवार को छोड़ दिया और आजीवन अविवाहित रहकर लोक सेवा को ही अपना धर्म माना।
“प्रेमचंद जी जैसे निस्वार्थ व्यक्तित्व का जाना समाज के एक मजबूत स्तंभ का ढह जाना है। उन्होंने स्वराज का जो सपना देखा था, उसे आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
— सुधीर कुमार पप्पू, समाजवादी चिंतक
समाज के लिए होम कर दिया अपना जीवन
प्रेमचंद जी का जीवन सादगी और संघर्ष की मिसाल रहा है। टाटा स्टील और जिला प्रशासन के साथ मिलकर उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कई ऐतिहासिक अभियान चलाए। उनके निधन पर शहर के कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
[तीसरी धारा न्यूज़ – एक सच्चे जनसेवक को नमन]










